रामनगरी से निकली पारंपरिक भरत यात्रा,पांच दिन में पहुंचेगी चित्रकूट भक्ति, प्रेम और समरसता का प्रतीक बना आयोजन।

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रामनगरी से निकली पारंपरिक भरत यात्रा,पांच दिन में पहुंचेगी चित्रकूट भक्ति, प्रेम और समरसता का प्रतीक बना आयोजन।

अयोध्या।

मर्यादा, भक्ति और भाईचारे की अनूठी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को अयोध्या से पारंपरिक भरत यात्रा धूमधाम के साथ चित्रकूट के लिए रवाना हुई। यह यात्रा पांच दिन में चित्रकूट पहुंचेगी। इस दौरान विभिन्न पड़ावों पर संतों और श्रद्धालुओं द्वारा इसका स्वागत किया जाएगा।भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों का पूजन मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास और श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी महंत राजकुमार दास महाराज ने किया। पूजन के पश्चात राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में यात्रा का शुभारंभ हुआ।महंत कमल नयन दास ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर निकली है। उन्होंने कहा, भरत जी का त्याग और समर्पण यह सिखाता है कि परिवार में प्रेम कैसा होना चाहिए। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह यात्रा निकाली जाती है।
लगभग 50 वर्षों से मणिराम दास छावनी से यह यात्रा पारंपरिक रूप से निकलती आ रही है। यात्रा में इस बार लगभग 1000 से अधिक साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हुए हैं। डमरू, नगाड़ों और जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से पूरी अयोध्या राममय हो उठी।
महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि यह यात्रा अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों में सजे पात्र इस यात्रा के प्रमुख आकर्षण हैं, जो रामायणकालीन भावनाओं को जीवंत करते हैं उन्होंने कहा।
यात्रा मार्ग में अनेक स्थानों पर श्रद्धालु स्वागत करेंगे और रात्रि विश्राम के दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। चित्रकूट पहुंचने पर संत कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करेंगे और भरत मिलाप कार्यक्रम में भाग लेंगे।
महंत राजकुमार दास ने कहा भरत जी का चरित्र हमें यह सिखाता है कि राजा का आचरण, भाई का प्रेम और पुत्र का दायित्व कैसा होना चाहिए। जब यह आदर्श जीवन में उतरेंगे, तभी एक आदर्श राष्ट्र का निर्माण संभव है।यह यात्रा त्रेता युग के उस प्रसंग की याद दिलाती है, जब भगवान श्रीराम वनवास के दौरान चित्रकूट में थे और भरत-शत्रुघ्न अयोध्या की प्रजा के साथ उन्हें वापस लाने पहुंचे थे। दोनों भाइयों के मिलन का वह पावन क्षण आज भी मानवता को भक्ति, त्याग और प्रेम का संदेश देता है।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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