चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया
प्राकट्य स्थल को देव स्थान के अधीन भेजने के लिए शुरू किया ज्ञापन अभियान।
बागुण्डवासी अब हुए मुखर
भादसोड़ा।
श्रीसांवलिया जी प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी की अव्यवस्थाओं एवं अनियमितताओं को लेकर अब आसपास के पांच गांवों के ग्रामीण भी मुखर होने लगे है। ग्रामवासियों की ओर प्राकट्य स्थल को देव स्थान के अधीन भेजने के लिए ज्ञापन अभियान शुरू किया गया है।
प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी में अनियमितता एवं अव्यवस्थाओं की चर्चा आये दिन खबर में रहती है।
सोमवार से प्रारंभ किये गये ज्ञापन अभियान के तहत ग्राम वासियों का तर्क है कि प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी का विधान 14 जून 1985 से अमल लाया गया था और देवस्थान में इसका रजिस्ट्रेशन 31 मार्च 1987 को हो गया था। रजिस्ट्रेशन से पूर्व तक ग्राम पंचायत बागुण्ड ही यहां मेले का आयोजन करवाती थी। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि प्राकट्य स्थल को देव स्थान के अधीन लेकर विधि विधान से तथा सार्वजनिक रूप से यहां चुनाव करवाये जाए तथा यहां संपादित होने वाले सभी कार्य भी श्री सांवलिया जी प्राकट्य स्थल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही कराये जाए।
*अपने ही संविधान से किनारा किया कमेटी ने*
ग्रामवासियों का तर्क है कि प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी ने अपने ही संविधान से किनारा कर लिया है। कमेटी के संविधान में स्पष्ट उल्लेख है कि कमेटी का चुनाव प्रत्येक तीन साल में अनिवार्य रूप से होगा लेकिन वर्तमान में 2016 के बाद कोई चुनाव नही करवाये गये है। कमेटी के संविधान में लिखा हुआ है कि कार्यकारिणी की मीटिंग महीने में एक बार हर अमावस्या को होगी। कमेटी की जनरल मीटिंग में 49 मैम्बरों में से एक तिहाई की उपस्थिति होने पर तथा कार्यकारिणी की बैठक में 15 सदस्यों में से एक तिहाई की उपस्थिति होने पर कार्यवाही शुरू मानी जायेगी। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा संविधान का एक भी बिन्दु अमल में नहीं लाया जा रहा है। ग्रामवासियों का कहना है कि संविधान के अनुसार कमेटी में भादसौड़ा, बागुण्ड, सोहनखेड़ा, गुडा व मदनपुर के कुल 65 सदस्य है और इन सदस्यों में से कई दिवंगत भी हो चुके है। कमेटी में अध्यक्ष परम्परागत रूप से एक ही परिवार का बनने के चलते ग्रामीणों ने राज्य सरकार से मांग की है कि कमेटी का संविधान लागू होने के बाद से अब तक जारी पुष्तैनी रूप से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व कोषाध्यक्ष बनाये जाने की परम्परा को समाप्त किया जाकर विधि विधान से तथा सार्वजनिक रूप से चुनाव सम्पन्न कराये जाए।
*पूर्व में भी उठी थी अधिग्रहण की मांग*
प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी के अधिग्रहण को लेकर पहली बार मांग नहीं उठी है। पूर्व में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में 2023 में भी इस कमेटी के अधिग्रहण को लेकर मांग उठ चुकी है। वर्ष 2023 में भादसौड़ा सरपंच शंभु सुथार ने कमेटी में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितता, मनमानी व धांधली को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को शिकायत की थी। जिस पर विषेषाधिकारी (मुख्यमंत्री) ने दिनांक 5 जुलाई 2023 को जिला कलक्टर चित्तौड़गढ़ को पत्र प्रेषित कर सात दिवस में जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेष करने को कहा था लेकिन उक्त जांच आगे नही बढ़ पाई और बाद में सत्ता परिवर्तन हो गया।
*चर्चित रही है प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी*
प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी विगत कुछ समय से अव्यवस्थाओं एवं अनियमितताओं को लेकर चर्चा का केन्द्र रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी द्वारा जो भी निर्णय लिए जाते है वह विधान से परे जाकर बिना किसी को बताये फर्जी हस्ताक्षर कर ले लिए जाते है। कमेटी द्वारा बिना निविदा आमंत्रित किये कार्य संपादित कराये जाते है तथा मटेरियल की सप्लाई भी कमेटी के पदाधिकारियों के यहां से ही होती है जो भ्रष्टाचार को इंगित करती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि कमेटी द्वारा लिए गए निर्णय एवं कराये गये कार्यो की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाई जाना आवष्यक है। हाल ही में जलझूलनी एकादशी के वार्षिक मेले में एक कार्यक्रम के दौरान अश्लीलता एवं फूहडता को रोकने गये विहिप जिलाध्यक्ष के साथ आयोजकों एवं कलाकारों द्वारा न सिर्फ धक्का मुक्की की गई थी बल्कि मंच से खुलेआम अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया गया था जिस पर हिन्दूवादी संगठनों ने आक्रोष व्यक्त करते हुए सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया था।
*प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी की मनमानी*
प्राकट्य स्थल पर संचालित कमेटी की मनमानी भी आये दिन चर्चाओं में रहती है। ग्रामीणों के अनुसार कमेटी में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ समय समय पर जब भी कोई आवाज उठाता है तो उसे झूठे मुकदमे में फंसा दिया जाता है। कमेटी के सचिव को भी जब अवगत कराया जाता है तो वे भी अपनी उम्र तथा हृदय रोग का हवाला देते हुए कहते है कि इस उम्र में मुझे कोई भी टॉर्चर ना करे जबकि पदाधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाने में न तो उम्र और ना ही उनकी बीमारी आडे आती है। ग्रामीणों ने तो यहां तक आरोप लगाये है कि मंदिर की कई प्रॉपर्टियों पर पदाधिकारियों ने अवैध कब्जे कर रखे है। आस्था के चलते कई लोग शादी ब्याह एवं अन्य समारोह के लिए मंदिर की धर्मशाला व हाॅल की मांग समय समय पर करते रहते है तथा निर्धारित शुल्क अदा करने को राजी होने के बावजूद मंदिर कमेटी द्वारा अनुमति नहीं दी जाती है। हाल ही में 5 सितम्बर को भी मंदिर कमेटी से एसी हाॅल की मांग की गई थी तथा आयोजक इस हेतु पचास हजार रुपये जमा कराने को भी तैयार हो गये थे लेकिन इसके बावजूद कमेटी वालों ने आयोजकों को तर्क दिया कि आप हमें सहयोग नहीं करते हो इसलिए हम भी आपका सहयोग नहीं करेंगे।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





