रामनगरी अयोध्या में रंग महल में झूलन उत्सव की दिव्य झलक, गलवैया झांकी बनी आस्था का केंद्र।
मोरी छोड़ो ना बईया अवध सैयाँ,की धुन पर झूम उठा रंग महल।
अयोध्या।
सावन माह की पवित्र एकादशी पर रामनगरी अयोध्या के रंग महल मंदिर में झूलन उत्सव की ऐसी दिव्यतम और भव्यतम झलक सामने आई, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में विशेष झूलन उत्सव का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अनुपम संगम देखने को मिला उत्सव के मुख्य आकर्षण रही गलवैया झांकी, जिसमें रजत जड़ित चांदी के झूले पर भगवान श्रीराम, माता सीता को आलिंगनबद्ध कर झूला झूलते हुए विराजमान हुए। यह झांकी भक्तिरस और प्रेम की चरम अभिव्यक्ति थी, जिसे देखकर श्रद्धालु एवं उपस्थित संत महंत भाव विभोर हो उठें। पूरा परिसर भक्ति गीत “मोरी छोड़ो ना बईया अवध सैयाँ” से गूंजायमान होता रहा इस आयोजन का नेतृत्व मंदिर के वर्तमान महंत श्री रामशरण दास जी महाराज के पावन सान्निध्य में हुआ, जिनके मार्गदर्शन में यह उत्सव अत्यंत भव्यता और उल्लास के साथ संपन्न हुआ उत्सव में सैकड़ों श्रद्धालु, संत-महंत और भक्तगण बड़ी श्रद्धा के साथ सम्मिलित हुए। आगंतुक संतों और अतिथियों का विधिवत स्वागत सम्मान किया गया। वहीं, मंदिर से जुड़े छोटू भैया भैया द्वारा आगंतुकों को प्रसाद वितरण कर भक्तिभाव और सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया गया इस वर्ष विशेष बात यह रही कि रजत जड़ित चांदी का झूला, जो झांकी का केंद्र बना, उसका निर्माण तुलसी देवी पत्नी स्वर्गीय श्री लक्ष्मीनारायण जी के भावपूर्ण योगदान और उनके चार पुत्र—अयोध्या प्रसाद, परमेश्वरलाल, रामप्रकाश, रामदास, तथा तीन पौत्र—राघवेंद्र, अक्षत एवं मुकुंद द्वारा कराया गया। इस अद्भुत सहयोग ने आयोजन में एक और अध्यात्मिक सौंदर्य जोड़ दिया श्रद्धा, भक्ति और परंपरा का ऐसा संगम अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को एक नई ऊंचाई प्रदान करता है।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





