अवध बिहारी कुंज में झूलनोत्सव का अनुपम उत्सव, ठाकुर जी के झूले ने हर भक्त का मन मोहा।
महंत गणेश दास बोले – यह पर्व भगवान के साथ आत्मिक जुड़ाव का अवसर है, जो युगों-युगों से चला आ रहा है
अयोध्या। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से ओतप्रोत श्रावण मास में जब झूले पर विराजमान ठाकुर जी को प्रेमपूर्वक झुलाया जाता है, तो यह नजारा केवल आंखों को ही नहीं, आत्मा को भी शांति देता है। श्री अवध बिहारी कुंज में आयोजित झूलनोत्सव के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास की त्रिवेणी बह निकली।
सुनहरे वस्त्रों में सजे श्री अवध बिहारी लाल को फूलों और रंगीन रेशमी कपड़ों से सुसज्जित झूले में विराजमान किया गया। झूले को सजाने में श्रद्धालुओं और सेवायतों ने दिन-रात एक कर दिया था। जैसे ही आरती आरंभ हुई, पूरा परिसर “जय कन्हैया लाल और जय सियाराम के जयघोष से गूंज उठा।
इस अवसर पर महंत गणेश दास जी महाराज ने भावविभोर होकर कहा,
झूलनोत्सव केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, यह भक्त और भगवान के बीच प्रेम की रसधारा है। यह उत्सव अनादि काल से चला आ रहा है और आज भी उतनी ही श्रद्धा से मनाया जाता है जितना द्वापर युग में ब्रजवासियों द्वारा मनाया गया था।
भजन संध्या में प्रसिद्ध गायकों ने जब “राधे रानी झूला झूलें, सांवरा संग प्यारा लागे” जैसे मधुर भजन गाए, तो श्रद्धालु झूम उठे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी झूले को अपने हाथों से झुलाकर स्वयं को धन्य मान रहे थे। मंदिर प्रांगण को फूलों, दीपों और रंगीन रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया था।
रात्रि में विशेष श्रृंगार दर्शन, मिष्ठान्न प्रसाद, एवं झांकी दर्शन का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन के सफल संचालन में मंदिर के सेवायतगण, भक्तजन और स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा।
Author: Rainbow News Hindustan
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