गुलाबसागर में दफन कर दिए हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश ?
कलक्टर और संभागीय आयुक्त भी नहीं दे रहे जवाब !
कपासन में गार्डन निर्माण का मामला।
चित्तौडगढ़। नरेंद्र सेठिया।
राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को, लगता है चित्तौड़गढ़ जिले की कपासन नगरपालिका ने वहां के प्राकृतिक जल स्त्रोत में दस-दस फीट मिट्टी का भराव डालकर दफन कर दिए है। वह भी, उस दशा में जब पालिका अध्यक्ष खुद हाईकोर्ट के रहमो-करम पर कुर्सी पर बैठी हुई है, लेकिन कतिपय भू-माफियाओं के निजी हितों को साधने में पूरा सहयोग कर रही है। वहीं जनहित विरूद्ध करोडों के काम तले हाईकोर्ट के आदेशों के दफन होने जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को होते हुए भी वे कुएं की मुंडेर पर बैठे कबूतर की तरह चुपचाप देख रहे हैं तथा जवाब देने से ही कतरा रहे है।
दरअसल, वितौडगढ जिले के कपासन कस्बे में गुलाब सागर एक प्राकृतिक जलस्त्रोत है। इसी गुलाब सागर के जल भराव क्षेत्र में वहां की नगर पालिका इन दिनों गार्डन का निर्माण करवा रही है। गुलाब सागर में गार्डन बनाने को लेकर कपासन नगरपालिका के निर्माण अभियंता खेमराज सिंह गुर्जर और अधिषाशी अधिकारी ललितसिंह देथा ने बताया कि प्राकृतिक जल स्त्रोत गुलाबसागर के जलभराव क्षेत्र में गार्डन बनाने का प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में लिया गया था, जिस जिस पर करीब चार करोड़ रूपए व्यय होंगे। जिसमें सरकार से अनुदान या सांसद-विधायक मद से कोई आर्थिक सहायता नहीं ली जा रही है, सारा बजट नगरपालिका अपनी बचत से ही वहन कर रही है। उन्होंने बताया कि 250 गुणा 250 फीट लंबे-चौड़े गार्डन बनाने का कार्य चालू वित्त वर्ष में ही पूरा कर लिया जाएगा। निर्माण अभियंता गुर्जर ने यह भी बताया कि इसी गुलाब सागर में जिस प्राकृतिक नाले से पानी की आवक होती है, उस नाले के कुछ भाग के दोनों तरफ पक्का निर्माण करवा कर ंउसे भी ढंका जा रहा है और ढंक कर नाले पर सड़क बनाई जाएगी।
कपासन नगर पालिका में जहां ये दोनों ही कार्य जहां इन दिनों युद्ध स्तर पर प्रगति पर है, वहीं कस्बे के जागरूक नागरिक इसका विरोध कर रहे है। गत दिनों लोगों ने कपासन एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और एसडीएम राजेश सुहालका को दोनों ही कार्यार् के विरोध में ज्ञापन भी दिया था। जिसमें गुलाब सागर के किनारे से गत दिनों बेदखल किए चाय-पान आदि की थड़ियां चलाने वाले लोग भी शामिल थे।
कस्बे वासियों के अनुसार नगरपालिका अध्यक्ष मंजूदेवी सोनी समेत सभी पार्षद और अधिकारी, राजस्थान हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। उनका कहना है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने सन् 2004 में अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान सरकार की बहुचर्चित जनहित याचिका पर फैसला दिया था कि राजस्थान के जल-स्रोतों की साल 1947 की स्थिति बहाल की जाए और रखी जाए, अतिक्रमण और निर्माण रोके जाए, जलागम रास्तों को यथावत रखा जाए आदि का उल्लंघन किया जा रहा है। कस्बावासियों के अनुसार नगरपालिका पुराने गार्डन के खुर्दबुर्द हो जाने के बाद अब नया गार्डन निहायत प्रभावशाली लोगों की जमीन की वैल्यूवेशन बढाने की नीयत से बनाया जा रहा है, जबकि गार्डन बनने से कई दुष्परिणाम होंगे। गुलाबसागर की जल भराव क्षमता तो घटेगी ही, वहीं आसपास के कुंओं, ट्यूबवैल आदि के पानी में कमी आने से उनके सूखने की भी पूरी संभावना है, जिससे फसलों के लिए संकट पैदा हो जाएगा। वहीं आमजन और मवेशियों के लिए भी पीने के पानी का संकट आ जाएगा।
इसी तरह नगरपालिका नाले को ढंककर उस पर सड़क इसलिए बनाना चाहती है कि नाले के दूसरी तरफ की जमीन पर काबिज पालिका अध्यक्ष के रिश्तेदारों व भू-माफियाओं को उपहार के तौर पर सड़क की सुविधा देना चाहती है, यह भी अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान सरकार मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना है। कस्बावासियों का आरोप है कि दोनों ही निर्माण कार्यां में आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की स्पष्ट तौर पर मिलीभगत है। इस बारे में जब पालिका अध्यक्ष मंजू देवी सोनी से संपर्क किया तो, उनके बेटे ने फोन रिसीव किया और कहा कि मम्मी अभी बिजी है।
—–निर्माण कार्यों पर उठता एक गंभीर सवाल ? —–
वैसे गुलाबसागर में गार्डन निर्माण और नाला ढंकने के काम प्रथम दृष्ट्या राजस्थान हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का मामला है, तो जाहिर है प्रशासनिक अधिकारियों की जानकारी में यह मामला है या नहीं।
इस बारे में कपासन एसडीएम राजेश सुहालका ने कहा कि वे नगरपालिका बोर्ड की बैठकों में मौजूद रहने के लिए बाध्य नहीं है। वहीं चित्तौड़गढ कलक्टर आलोक रंजन और उदयपुर संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी ने बार-बार कॉल करने के बावजूद कॉल ही रिसीव नहीं किए।
—–इनका कहना है—–
—-कपासन नगरपालिका बोर्ड की किसी बैठक में मौजूद रहने के लिए मैं बाध्य नहीं हूं। वहां क्या हो रहा है और क्या किया जा रहा है ? मुझे कुछ भी मालूम नहीं है।
— राजेश सुहालका, एसडीएम कपासन
— क्या है अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान सरकार प्रकरण ? —–
दरअसल, अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान सरकार का मामला राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पीआईएल थी, जिसमें जल स्त्रोतों को 1947 की स्थिति में बहाल करने का आदेश दिया गया था, इस मामले में अदालत ने एक कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए राज्य के जल-स्त्रोतों यथा-नदी, तालाब और नालों को उनकी मूल स्थिति में वापस लाने और रखने के आदेश दिए थे और ऐसे ही आदेश सुप्रीम कोर्ट भी विभिन्न मामलों में देता रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश साल 2004 में आया था, इसके वाद विभिन्न मामलों में भी पीड़ितों या याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश का रेफरेंस देकर अपनी कानूनी लड़ाईयां लड़ी है।
—एसडीएम कोर्ट ने भी दिया था फैसला ––
जानकारी के अनुसार 1980 के दशक में कपासन निवासी सोहनलाल व्यास ने इसी गुलाबसागर के मूल स्वरूप को बरकरार रखने के लिए वहां की एसडीएम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें एसडीएम कोर्ट ने नगरपालिका को गुलाब सागर के जल भराव क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं होने देने सहित अन्य गतिविधियां नहीं करने देने का आदेश दिया था।
—– पुराने गार्डन की नहीं ली सुध नया बनाने में जुटे—-
बता दें कि कपासन कस्बे में पहले भी एक उद्यान था, जिसका वर्ष 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने शिलान्यास किया था, वहां सुबह-शाम लोग समय व्यतीत करने आते थे, उसी जगह वर्तमान में सब्जी मंडी है और क्षतिग्रस्त दीवार पर गार्डन के शिलान्यास की पट्टिका भी 31 जुलाई 2025 तक मौजूद थी, लेकिन लोगों का आरोप है कि नगरपालिका ने जानबूझकर उसका मेटिनेंस नहीं रखा और खुर्दबुर्द होने दिया, ताकि दूसरा गार्डन बनाकर बढती आबादी के बीच गुलाबसागर इलाके की जमीन की वैल्यूवेशन बढ़ाई सके।
फोटो,प्राकृतिक जलस्त्रोत गुलाबसागर का जल भराव क्षेत्र।
जानकारी में यह भी आया है कि 1990 के दशक में तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष भेरूलाल सेन के कार्यकाल से अब तक सभी जनप्रतिनिधि गुलाबसागर के मूलस्वरूप को बिगाड़ने में लगे रहे है। जनप्रतिनिधियों ने प्राकृतिक जल स्त्रोत के किनारे अपने चहेते लोगों को बसाया, अतिक्रमण करवाया और यहां तक कि वहां सरकारी ‘अ’ श्रेणी पशु चिकित्सालय भवन भी बनवा दिया।
——————–
फोटो–गुलाबसागर के जल भराव क्षेत्र में निर्माणाधीन गार्डन।
फोटो,,कपासन की वर्तमान सब्जी मंडी और मंडी के बाहर दीवार पर लगी गार्डन की शिलान्यास पट्टिका।
फोटो– प्राकृतिक नाला जिस पर पक्का निर्माण करके ढंका जा रहा है।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





