महंत हरि रामशरण शास्त्री की मंगलवार को 25वीं पुण्य तिथि मनाई गई।
संजय यादव,अयोध्या :
सिद्धपीठ हनुमत सदन के साकेतवासी महंत हरि रामशरण शास्त्री की मंगलवार को 25वीं पुण्य तिथि मनाई गई। उन्हें याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है। हरि रामशरण को भक्ति- का संस्कार बचपन से ही मिला, किंतु उन्होंने वैराग्य खूब होश संभालने के बाद अंगीकार किया। यह खूब होश का ही चमत्कार था कि एक बार वैराग्य ग्रहण करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। बिहार के मधुवनी से वह अयोध्या आए, तो यहीं के होकर रह गए। गहन साधना, निष्काम भक्ति और निर्लिप्त-निर्विकार जीवनशैली से उन्होंने जल्दी ही गुरु का विश्वास प्राप्त किया और गुरु ने उन्हें हनुमतसदन का उत्तराधिकार समर्पित कर दिया। उन्होंने हनुमतसदन की श्री-समृद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि की। वह प्रेरक आचार्य के रूप में स्थापित हुए और शिष्यों की ऐसी पूरी पांत-पीढ़ी तैयार की, जो रामानंदीय रसिक परंपरा के माधुर्य, आत्मज्ञता और आराध्य के प्रति लीनता-मुग्धता के परिचायक बन कर स्थापित हुए। हनुमत सदन को उन्होंने योग्य उत्तराधिकारी दिया ही, उनके आध्यात्मिक प्रताप से उनके एक अन्य शिष्य एवं सांस्कृतिक उत्तराधिकारी रामलोचनशरण ने गुरु। के ही नाम से हनुमत हरिरामसदन की स्थापना की। मंगलवार को 25वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें इसी हनुमत हरिराम सदन में समारोहपूर्वक याद किया गया। आचार्य स्मृति पर्व के उपलक्ष्य में पवित्र ग्रंथों का पाठ-पारायण, भक्ति में पगे पदों का गायन, आराध्य विग्रह सहित आचार्य विग्रह का अभिषेक पूजन एवं भंडारा हुआ भंडारे में छोटी छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास महंत रामकुमार दास वरिष्ठ पुजारी रमेश दास, अधिकारी राजकुमार दास, महंत शशिकांत दास महंत मनीष दास , महंत राम लखन शरण, महान संजय, महंत जन्मेजा शरण, महंत विनोद शरण महंत रवि शंकर शरण, महंत राजीव लोचन शरण, महंत विनोद शरण, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी,पूर्व सांसद लल्लू सिंह आदि संत महंत उपस्थित रहे।
Author: Rainbow News Hindustan
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