भगवान परशुराम,भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं और उनका जन्म त्रेता युग में हुआ था। इस शुभसंयोग पर पूजा का विशेष महत्व है।

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अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है परशुराम जयंती।
अरावली पर्वतमाला के शिखर की गुफा में स्थित परशुराम महादेव का स्वयं भू शिवलिंग की परशुराम ने आराधना व तपस्या की थी। आज विश्वभर के शिव व विष्णु भक्तों का आस्था का केंद्र बना हुआ है।

अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान विष्णु,माता महालक्ष्मी व भगवान परशुरामजी की पूजा अर्चना आराधना कर दरिद्रता व निर्धनता से छुटकारा पाए।

परशुराम जयंती भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं भगवान परशुराम
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाती है। भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं और उनका जन्म त्रेता युग में हुआ था।

इस शुभसंयोग पर पूजा का विशेष महत्व है। इस बार वर्ष 2025 में तिथिनुसार अक्षय तृतीया के साथ ही परशुराम जयंती बुधवार, 30 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी।

अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस तिथि पर अपनी सामर्थ्य अनुसार जल, अनाज, वस्त्र, फल, मिठाई आदि का दान करें। तथा अपनी शक्तिनुसार सोना या चांदी आदि खरीदें, क्योंकि इस दिन धातु खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह अक्षय रहता है। इस पर्व पर पितरों के निमित्त तर्पण करना भी कल्याणकारी होता है।

तिथि और शुभ मुहूर्त

अक्षय तृतीया तिथिः वैशाख शुक्ल तृतीया तृतीया तिथि का प्रारंभः मंगलवार 29 अप्रैल 2025 को शाम 05 बजकर 31 मिनट से। तृतीया तिथि की समाप्तिः बुधवार, 30 अप्रैल 2025 को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर।

परशुराम जयंती पूजन विधि

अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती पर भगवान विष्णु और परशुराम जी की पूजा एक साथ की जा सकती है। यहां आपकी सुविधा के लिए सामान्य पूजन विधि दी जा रही है।

कैसे करे तैयारी।

प्रातः काल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल से शुद्ध करें। एक लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान परशुराम की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
संकल्पः हाथ में जल, अक्षत, फूल और द्वग्य लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
भगवान गणेश और नवग्रहों का आहान करें। विष्णु और लक्ष्मी पूजनः भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
उन्हें पीले फूल, चंदन, तुलसी के पते. धूप, दीप और नैवेद्य में खीर, फल, मिठाई आदि अर्पित करें। लक्ष्मी मंत्रः ॐ ‘ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः और विष्णु मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें। तथा विष्णु
सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं। शंख में जल भरकर पूजा में प्रयोग करें।

परशुराम पूजनः

भगवान परशुराम का ध्यान करें। उन्हें चंदन, दूर्वा और यदि संभव हो तो एक छोटा फरसा/ कुल्हाड़ी अर्पित करें।
‘ॐ जामदग्न्याय विद्यहे महावीराय धीमहि। तन्नो परशुराम प्रचोदयात।’ इस मंत्र का जाप करें। साथ ही आप परशुराम कथा का पाठ भी कर सकते हैं।

आरती:

भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान परशुराम की आरती करें।

प्रार्थनाः करे

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पूजन के पश्चात अपनी मनोकामनाएं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
प्रसाद वितरणः करे।
पूजा में अर्पित नैवेद्य को परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में वितरित करें।

इस प्रकार आप अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम की जयंती पर विधि-विधान से पूजा करके उनकर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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