संस्कृत भाषा को संस्कृत संभाषण के माध्यम से लोक व्यवहार की भाषा बनाएं-माली

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संस्कृत भाषा को संस्कृत संभाषण के माध्यम से लोक व्यवहार की भाषा बनाएं -माली
सादड़ी,पाली।

संस्कृत भाषा ज्ञान विज्ञान की भाषा है, संस्कृति व संस्कारों की भाषा है। संस्कृत शिक्षकों को संस्कृत संभाषण के माध्यम से इसे लोक व्यवहार की भाषा बनाना चाहिए। उक्त उद्गार अतिरिक्त मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी देसूरी विजयसिह माली ने स्थानीय राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय बारली सादड़ी में राजस्थान राज्य संस्कृत शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के तत्वावधान में आयोजित छ दिवसीय संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में व्यक्त किए।
माली ने कहा कि संस्कृत भाषा को संस्कृत गीत, कहानियों,प्रहेलिका का उपयोग करते हुए रोचक तरीके से पढ़ाया जाना चाहिए साथ ही विद्यालय में व घरों में संस्कृत संभाषण को प्रोत्साहित करना चाहिए। शहरी संकुल प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी मधु कुमारी गोस्वामी,दक्ष प्रशिक्षक मदनलाल शर्मा व हरिनारायण जोशी ने भी विचार व्यक्त किए।समापन सत्र की अध्यक्षता संस्था प्रधान मीठालाल ने की।
सरस्वती पूजन से प्रारंभ हुए इस समापन समारोह में सर्वप्रथम सुमन सोनी ने शिविर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तत्पश्चात ओमप्रकाश प्रजापत, कमलेश कुमार ने अनुभव कथन किय तथा प्रशिक्षण शिविर को शिक्षकों के लिए उपयोगी बताया। उर्मिला शर्मा ने आभार व्यक्त किया।भावेश कुमार ने व्यवस्थाएं संभाली।मंच संचालन मीठालाल ने किया।
इससे पहले इस छ दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में पाली जालोर व सिरोही जिले के संस्कृत विद्यालयों के 40शिक्षकों ने भाग लिया।दक्ष प्रशिक्षक हरिनारायण जोशी व मदनलाल शर्मा ने अलग-अलग सत्रों में संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण प्रदान किया।अंत में सभी ने वदतु संस्कृतम् जयतु भारत का संकल्प लिया।
उल्लेखनीय है कि संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को संस्कृत संभाषण में क्षमता संवर्धन हेतु पूरे राज्य में इस तरह के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।यह शिविर 2फरवरी से प्रारंभ हुआ।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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