अरावली बचाओ, पर्यावरण बचाओ महाअभियान।

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चित्तौडगढ से नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट

अरावली बचाओ, पर्यावरण बचाओ महाअभियान

के तहत महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन

चित्तोड़गढ़ श्री बालाजी सेवा संस्थान चित्तौडगढ ने राष्ट्रपति महोदय के नाम कलेक्टर कार्यालय चित्तौडगढ मे ज्ञापन सौंप गुहार लगाई
अरावली पर्वतमाला के अस्तित्व पर मंडरा रहे गंभीर खतरे के संबंध मे आपका ध्यान आकर्षित करे
यह निर्णय पर्यावरण के लिए एक मृत्युंजय प्रमाण पत्र के समान है
क्योकि इससे इन पहाडियो मे बेरोकटोक खनन और निमार्ण गतिविधियों का रास्ता खुल जाएगा

अरावली पर्वतमाला भारत
के उत्तर पश्चिम भाग के पालनपुर से शुरू होकर राजस्थान और हरियाणा से गुजरते हुए।
दिल्ली तक दक्षिण-पश्चिम से उत्तर पूर्व दिशा में लगभग 670 से 800 किलोमीटर तक फैली
हुई है। जो दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला में से एक है और थार रेगिस्तान को रोकने में
अहम भूमिका निभाती है। यह अपने राजस्थान के लिए एक तरह से जीवन के फेफड़े हैं, जो
कि हमें सांस की क्रिया देना और जिंदा रखने में अहम भूमिका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश
अनुसार 100 मीटर से नीचे की पहाड़ीयो को हटाने का आदेश दिया हैं जो कि देशभर से
हरियाली को समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आमजन, पशु पक्षीयो जानवरों के साथ
न्यायविरुद्ध फैसला किया है। अगर इसे रोका नहीं गया तो हमारी स्थिति भी पश्चिमी राजस्थान
की तरह रेतीले इलाकों की जैसी हो जाएगी जो की एक तरह से बंजर भूमि है।
इन पहाडियो के दोहन से भूजल स्तर और नीचे जाएगा,जिससे पानी की कमी और बढ़ेगी
धूल और पदुषण बढेगा जिससे दिल्ली एनसीआर की हवा और खराब होगी
यह निर्णय खनन माफियाओ को लाभ पहुंचाएगा और जैव विविधता को नुकसान पहुंचाएगा ।
यह स्थिति आने वाले पीढियो के लिए विनाशकारी होगी

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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