तीर्थयात्रा ने महाराष्ट्र से लेकर अयोध्या और काशी की धरा को जोड़ते हुए आस्था का ऐसा अद्भुत संगम रचा।

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तीर्थयात्रा ने महाराष्ट्र से लेकर अयोध्या और काशी की धरा को जोड़ते हुए आस्था का ऐसा अद्भुत संगम रचा।

अयोध्या।

भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक उमंग से परिपूर्ण एक अनोखी तीर्थयात्रा ने महाराष्ट्र से लेकर अयोध्या और काशी की धरा को जोड़ते हुए आस्था का ऐसा अद्भुत संगम रचा, जिसका अनुभव हजारों भक्तों के मन में आजीवन अंकित रहेगा। सन्मार्ग फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रवादी महिला कांग्रेस की पदाधिकारी श्रीमती शीतल आशीष येलावंडे तथा उनके पति आशिषदादा येळवंडे और मित्र परिवार के संयुक्त प्रयास से इस वर्ष भव्य निःशुल्क अयोध्या–काशी देवदर्शन यात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा में लगभग 3000 श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिन्हें विशेष ट्रेन द्वारा महाराष्ट्र से रामनगरी अयोध्या और शिवनगरी काशी के अद्भुत दिव्य दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ।यह यात्रा अपने विराट स्वरूप के साथ-साथ अपनी उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के कारण भी चर्चा का विषय बनी रही। यात्रियों के लिए नाश्ता, दोपहर-भोजन, रात्रिभोज से लेकर रहने, सुरक्षा और प्राथमिक उपचार तक की व्यवस्था आयोजकों द्वारा की गई। हर आयु की महिलाओं ने सुरक्षित यात्रा और पारिवारिक वातावरण की सराहना करते हुए आयोजकों को भरपूर आशीर्वाद दिया।
यात्रा की शुरुआत स्टेशन पहुंचने के साथ हुई। स्टेशन पर जय-जयकार का वातावरण कुछ ऐसा बना मानो पूरा परिसर भक्ति रस में डूब गया हो। “जय श्रीराम”, “श्री काशी विश्वनाथ की जय,आशीष दादा और शीतल ताई नारे यात्रा के दौरान बार-बार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। विशेष ट्रेन में हजारों की संख्या में महिलाओं का एक साथ भजन-कीर्तन करना दृश्य को और भी भव्य बना देता था। अयोध्या में मीडिया से बातचीत में आशिषदादा येळवंडे ने कहायह सब प्रभु श्रीराम और बाबा विश्वनाथ की दिव्य इच्छा है। हमारा इसमें कोई व्यक्तिगत योगदान नहीं है। हम केवल निमित्त हैं। माता-भगिनियों के आशीर्वाद से यह अवसर मिला और इसे हम कृतार्थ होकर पूरा कर रहे हैं। वहीं राष्ट्रवादी महिला समूह की अध्यक्ष शीतल ताई ने भावुक स्वर में कहाभगवान राम और भगवान शिव की असीम कृपा से मुझे ऐसे जीवनसाथी मिले जो समाजसेवा को अपना धर्म मानते हैं। हजारों माता-बहनों की इच्छा पर अयोध्या और काशी की यह यात्रा कराना हमारे लिए सौभाग्य है। ऐसा सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता, और इसका श्रेय मैं अपने पति और सभी सहयोगियों को देती हूँ।
अयोध्या पहुंचने पर भक्तों ने सबसे पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में नव्य और भव्य मंदिर के दर्शन किए। रामलला के दिव्य स्वरूप के दर्शन करते ही कई भक्तों की आंखें नम हो गईं। भक्तों ने रामधुन गाई, मंदिर प्रांगण में भजन किए और प्रभु के चरणों में शीश नवाकर अपने जीवन की पूर्णता का अनुभव किया। बच्चों से लेकर वृद्धों तक, हर किसी ने इसे अपने जीवन की सबसे अलौकिक अनुभूति बताया।यात्रा के समापन पर भक्तों ने आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस प्रकार की यात्रा न केवल धार्मिक अनुभव प्रदान करती है, बल्कि समाज में आपसी एकता और सद्भावना को भी मजबूत बनाती है। कई महिलाओं ने तो अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा कि उनके लिए ऐसी यात्रा करना संभव ही नहीं था, लेकिन सन्मार्ग फाउंडेशन और येलावंडे परिवार ने उनके सपनों को साकार कर दिया।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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