करोड़ों रुपए की जमीन के फर्जी पट्टे जारी कर जमीन हड़पने मामला,जांच के दिए आदेश।
चित्तौड़गढ़ नरेन्द्र सेठिया
जमीन फर्जीवाड़ा में कार्रवाई का इंतजार
विकास अधिकारी की अस्मिता पर उठ रहे सवाल
भूपालसागर
करोड़ों रुपए की जमीन पर फर्जी पट्टे जारी कर जमीन हड़पने के मामले में लगातार शिकायतों के बाद अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद द्वारा जांच के आदेश दिए गए हैं। दरबदर की ठोकरे खाने के बाद विकास अधिकारी को इस मामले में जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। ऐसे में 26 फर्जी पट्टों के नवीनीकरण का यह मामला एक बार फिर घूम फिर कर पंचायत समिति विकास अधिकारी की अस्मिता का यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा हो गया है। पूरे मामले में बड़ी बात यह है कि अब विकास अधिकारी सेवानिवृत्ति कार्मिक के विरुद्ध जांच करेंगे ऐसे में सवाल यह है कि क्या जांच रिपोर्ट की सुचिता बनी रह पाएगी, उल्लेखनीय है कि इस मामले में ग्रामीण पुलिस महानिदेशक पंचायती राज मंत्री और प्रदेश की सरकार के मुखिया तक कार्रवाई को लेकर गुहार लगा चुके हैं। ऐसे में इतने बड़े हाई प्रोफाइल मामले में जांच रिपोर्ट न केवल विकास अधिकारी बल्कि प्रदेश के गुड गवर्नेंस के दावे करने वाले तमाम जिम्मेदारों की अस्मिता का भी प्रश्न है।
यह है मामला
भोपाल सागर पंचायत समिति के राजस्व ग्राम चौकड़ी में भूमि के 26 पट्टे के मामले में मृतक पूर्व सरपंच माधव लाल जाट के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए अवैध रूप से पत्रावली जारी की गई। इस मामले में तत्कालीन सरपंच मंजू देवी मेनारिया जो वर्तमान में प्रशासक है एवं ग्राम विकास अधिकारी पूरणमल माली ने पूरे मामले में बिना तथ्यों की जांच किये भूखंडों का नामांतरण एवं नवीनीकरण कर दिया। पंचायती राज अधिनियम के नियमों के उल्लंघन को लेकर लगातार शिकायतें होने के बाद मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद चितौड़गढ़ विनय पाठक ने पत्रावली निरस्त करने एवं कार्यालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
ठोकरे खाते रहे ग्रामीण अब हुई सुनवाई
इस पूरे मामले में फर्जी वाड़े को लेकर ग्रामीणों ने कार्रवाई की मांग को लेकर कोई भी प्रयास करना बाकी नहीं रखा। जनसुनवाई से लेकर मुख्य शासन सचिव संभागीय आयुक्त जिला पुलिस अधीक्षक से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की। ऐसे में ग्रामीणों की शिकायतों को लेकर अब तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी जा रही है इससे स्पष्ट है कि न्याय के लिए ग्रामीणों के संघर्ष की कहानी छोटी नहीं है।
अब भी अस्मिता का सवाल जांच रिपोर्ट
ग्रामीणों के लिए जांच का यह आदेश केवल तात्कालिक राहत कहा जा सकता है क्योंकि 8 महीने के लगातार संघर्ष के बाद अब इस मामले में जांच के आदेश हुए लेकिन ग्राम पंचायत के विकास अधिकारी को इस मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पूरणमल माली ने भी इस मिली भगत को पूरा आश्रय दिया जो अब राजकीय सेवा से सेवानिवृत हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में अब एक सेवानिवृत्ति अधिकारी के विरुद्ध जांच करेगा ऐसे में सही जांच हो पाएगी इसे लेकर संदेह बना हुआ है। क्योंकि सेवानिवृत्ति के पश्चात कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हो सकती है। राजमार्ग के समीप करोड़ की जमीन हड़पने के इस मामले में इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पूरे प्रकरण में फर्जी वादे के जरिए लाभान्वित होने वाले लोगों में कई नामचीन लोग भी शामिल है। ऐसी स्थिति में भ्रष्टाचार पद के दुरुपयोग और राजकोष को नुकसान पहुंचाने गए इस गंभीर मामले में समान स्तर के अधिकारी से जांच करना पूरे मामले को और संतृप्त बना रहा है। साथ ही पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि इस पूरे फर्जी वाले को अंजाम देने वाले लोगों के विरुद्ध कोई कार्रवाई हो पाती है या फिर पूरा मामला ठंडा बस्ते में चला जाएगा।
ग्रामीणों की शिकायत प्राप्त हुई थी जिस पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए जांच कमेटी गठित की गई है जिसमें प्रारंभिक रूप से विधि विरुद्ध कार्रवाई होने की जानकारी सामने आई है दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही चोरवडी ग्राम पंचायत के लोगों ने चित्तौड़गढ़ जिलें के बडे़ नेता व क्षैत्र के जनप्रतिनिधि की मिली भगत होने के कारण सरपंच को सरक्षण मिला होने के कारण कोई कार्यवाही नही होने को लेकर आरोप लगायें गयें ।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





