मूक बधिर बच्चो को दया की भीख नहीं शिक्षा और सम्मान देकर करे सहयोग-रानी अवस्थी

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मूक बधिर बच्चो को दया की भीख नहीं शिक्षा और सम्मान देकर करे सहयोग- रानी अवस्थी

मूक बधिर बच्चो के साथ केक काटकर धूमधाम से मनाया गया विश्व बधिर दिवस

अयोध्या धाम l

दिव्यांग बच्चों की संस्था मुस्कान पुनर्वास केंद्र कनीगंज अयोध्या में मूकबधिर बच्चों ने विश्व बधिर दिवस धूमधाम से मनाया। सभी बच्चों ने उक्त अवसर पर केक काटा और बधिर दिवस की खुशियां मनाई। बच्चों ने सांकेतिक भाषा में कहा कि हम बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते हैं तो क्या हुआ हमारे अंदर भी भावनाएं हैं और हम आपकी बात भी समझते हैं। हम भी आपकी तरह पढ़ाई करते हैं। नौकरी करते हैं और देश से प्यार करते हैं तथा देश के विकास में सहयोग करते हैं। हम दिव्यांग है तो क्या ईमानदारी और मेहनत से अपने माता-पिता तथा परिवार की देखभाल करते हैं। हम भी वो सभी काम करते हैं जो आप करते हैं अतः आप हमारी पढ़ाई तथा हमें आगे बढ़ाने में सहयोग करें दया की भीख ना दें सम्मान की जिंदगी दे। उक्त अवसर पर डॉक्टर रानी अवस्थी ने कहा कि बधिर दिवस को सांकेतिक भाषा दिवस भी कहा जाता है जो कि मूक बधिर बच्चों की भाषा है। आज दुनिया की 10% आबादी किसी न किसी कारण से दिव्यांग है जिसमें से मूक बधिर की भी संख्या लगभग 6 % है जो की जन्म से ,बीमारी से ,दुर्घटना से ,प्रदूषण से श्रवण बाध्यता दिव्यांग हो रहे हैं। अतः हमारा फर्ज है कि हम अपने बच्चों को दिव्यांग होने से बचाएं और यदि दिव्यांग है तो छुपाय नहीं उसे पढ़ाकर अच्छा जीवन प्रदान करें। समाज को भी चाहिए कि क्यों कि मूक बधिर बच्चे आपकी बात को सुन नहीं सकते इसलिए धैर्यपूर्वक उनकी बात को समझें और उनका सहयोग करें। शासन स्तर पर भी उनकी समस्या का समाधान सर्वोपरि होना चाहिए। जिला स्तर पर दिव्यांग प्रमाण पत्र न बनना सबसे बड़ी समस्या है जिसका समाधान होना चाहिए तथा स्वैच्छिक संस्था के लोग इन्हें अधिक से अधिक जॉब में रखें ये सामान्य से अच्छा काम करते हैं।अंत में प्रबंधक राघवेंद्र अवस्थी ने आभार प्रकट किया।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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