धर्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर ही अयोध्या की पहचान – प्रदीप महाराज
अयोध्या धाम में मां सरयू जन्मोत्सव एवं छठी महोत्सव की भव्य छटा
महाआरती और फूल बंगले की झांकी ने दर्शकों का मन मोहा : दुर्गेश महाराज
संजय यादव l
अयोध्या धाम। नमामि सरयू सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में मां सरयू जन्मोत्सव एवं छठी महोत्सव का आयोजन ऐतिहासिक भव्यता और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। संत तुलसीदास घाट के निकट कच्चे घाट पर आयोजित इस पावन पर्व की शुरुआत मां सरयू जी की से हुई। महाआरती के उपरांत फूल बंगले की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। माँ सरयू के संत तुलसीदास घाट निकट कच्चे घाट पर पर धार्मिक भजनों, दीपों की छटा और संतों की उपस्थिति ने पूरे माहौल को दिव्य और भव्य बना दिया। कार्यक्रम में श्री लड्डू गोपाल धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रदीप महाराज, तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष दुर्गेश महाराज, राजा महाराज, तथा चौधरी सौरभ पांडेय समेत अयोध्या के अनेक संत, श्रद्धालु एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में मां सरयू जी की स्तुति वंदना के साथ घाट क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। प्रदीप महाराज ने कहा कि “मां सरयू केवल एक नदी नहीं, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान हैं। उनका जन्मोत्सव हमें यह स्मरण कराता है कि जल, प्रकृति और संस्कृति की आराधना ही सनातन धर्म का मूल है। इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं और आस्था से जोड़ने का सशक्त माध्यम मिलता है।”
मां सरयू जी की पारंपरिक महाआरती , फूल बंगले की आकर्षक झांकी , वैदिक मंत्रों के साथ संतों का समागम , पर्यावरण संरक्षण एवं नदी स्वच्छता का संदेश कार्यक्रम के समापन पर घाट की स्वच्छता के लिए श्रमदान भी किया गया और श्रद्धालुओं से अपील की गई कि मां सरयू की निर्मलता बनाए रखने हेतु सभी जिम्मेदारी से योगदान दें। यह आयोजन अयोध्या में न सिर्फ धार्मिक जागरूकता का प्रतीक बना, बल्कि सांस्कृतिक एकता और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का सुंदर उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
Author: Rainbow News Hindustan
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