हनुमत निवास संस्थापक महंत स्वामी गोस्वामी दास एवं महंत रघुनंदन पुण्यतिथि

बड़ी धूमधाम से मनाई गई।
संजय यादव अयोध्या
अयोध्या का हनुमत निवास मंदिर देश के शीर्ष सिद्ध हनुमत पीठ में एक है। इसकी स्थापना सिद्ध संतों की माला के सुमेरू स्वामी गोमतीदास महाराज ने की। 12 साल की कठिन तपस्या के बाद उन्हें श्रीहनुमान ने चित्रकूट की एक गुफा में साक्षात दर्शन दिया। इस पर उन्होंने उनसे रोज अपने इस दिव्य रूप का दर्शन देने का आग्रह किया।
बताया जाता है कि इस पर श्रीहनुमान के कहा कि उनके इस दिव्य रूप का दर्शन रोज साक्षात नहीं हो सकता। वे और जहां चाहे इस स्वरूप का दर्शन कर सकते हैं। इस पर स्वामी गोमती दास ने गुफा में पड़े पत्थर पर श्री हनुमान का दर्शन आरंभ कर दिया। इसी पत्थर के रूप में श्रीहनुमान को लेकर वे अयोध्या आए। जो आज भी हनुमत निवास में विराजमान होकर लाखों भक्तों का कल्याण कर रही है।
हनुमत निवास के संस्थापक आचार्य और सिद्ध संतों में अग्रणी स्वामी गोमती दास महाराज और उनके शिष्य स्वामी रघुनंदन दास महाराज की 27 मार्च को पुण्यतिथि है। इस अवसर पर सिद्धपीठ हनुमत निवास पीठ के वर्तमान महंत डाक्टर मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया कि अयोध्या भू वैकुण्ठ अर्थात धरती पर वैकुंठ है। यहां भगवान श्रीसीतारामजी के साथ ही उनके परम प्रिय पार्षदों के भी दिव्य चरित्र प्रकट होते रहते हैं। ये दिव्य चरित्र लोक में सन्त-चरित्र के रूप में प्रसिद्ध होते हैं। पूज्य स्वामी गोमतीदास जी महाराज का जीवन-चरित्र अयोध्या की सन्त-परम्परा का ऐसा ही एक अलौकिक आख्यान है।
रसिक परम्परा में श्री हनुमान जी की उपासना को वैशिष्ट्य स्वामी गोमतीदास प्रदान किया
उन्होंने कहा कि श्रीरामानन्द सम्प्रदाय की रसिक परम्परा में श्री हनुमान् जी की उपासना को वैशिष्ट्य गोमतीदास जी महाराज ने प्रदान किया। स्वामी जी का प्राकट्य उन्नीसवीं शती के मध्य पंजाब प्रान्त के होशियार पुर जिले के मुकेरियाँ में हुआ। वैशाख मास की अक्षय तृतीया को जन्मे स्वामी गोमतीदास जी महाराज का बाल्यकाल का नाम रामदास रखा गया।
8 वर्ष की अल्पायु में माता का देहान्त हो जाने से आपके अंदर में मौजूद विरक्ति को जैसे व्यक्त होने का मार्ग मिल गया। अपने पिता से विशेष आग्रह करके आप अमृतसर आ गये। वहाँ पंडित तुलसीराम से श्रीरामकथा का संस्कार प्राप्त करने के उपरान्त आप दुर्गाना मन्दिर के पूज्य सन्त तुलसीदास के सान्निध्य में रहे।
डाक्टर मिथिलेश नंदिनी शरण ने आगे बताया कि उन्हीं के सन्त तुलसीदास निर्देश के अनुसार आपने पूज्य स्वामी सरयूदास महाराज से पञ्च संस्कार प्राप्त किया और रामदास से बदलकर उनका साधुता का नाम ‘गोमतीदास’ हुआ।
स्वामी गुलाब दास ने आपको योग मार्ग के गूढ़ रहस्यों का बोध कराया
दिल्ली फर्रुखाबाद तथा कुछ काल तक विद्या अभ्यास हेतु वृन्दावन में रहकर पुनः देशाटन के क्रम में लाहौर, मुल्तान तथा शिकारपुर की यात्रा करते हुये महान साधक सन्त गुलाबदास जी महाराज के पास रहे। शिष्यवत सेवा से प्रसन्न हुये स्वामी गुलाब दास ने आपको योग मार्ग के गूढ़ रहस्यों का बोध कराकर उनके अभ्यास में
अपने बाबा गुरु स्वामी तुलसीदास महाराज के अन्तिम समय में आप शिकारपुर से अमृतसर लौटे। पुनः हरिद्वार, काशी और अयोध्या की यात्रा की। थोड़े समय अयोध्या में रहकर स्वामी गोमतीदास जी चित्रकूट गये। चित्रकूट में बाँके की सिद्ध की गुफा में मौन परायण रहकर कठोर तपस्या पूर्वक बारह वर्ष व्यतीत किये।
आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण भगवान का साक्षात्कार का लाभ प्राप्त करके श्रीहनुमान् जी के निर्देश से पुनः श्री अयोध्या आये और कुछ समय तक विचरण करते रहने के उपरान्त श्री लक्ष्मण किला के तत्कालीन महंत पंडित जानकीवर शरण जी महाराज से सम्बन्ध दीक्षा प्राप्त की।
कुछ समय बाद, पंडित जी महाराज आपको भगवान श्री चंदको दंडपाणि की उपस्थिति में ले आए, जिसे चांदीपुर मंदिर कहा जाता था। श्री हनुमान जी महाराज के दर्शन के कारण चांदीपुर के मंदिर का नाम ‘श्री हनुमान निवास’ रखा गया।
अपनी कठिन तपस्या और उपासना की निष्ठा के कारण अयोध्या की आध्यात्मिकता के प्रतिनिधि सन्तों में स्वामी गोमतीदास महाराज एक माने जाते हैं। समाधि सिद्ध सन्त कोठेवाले महाराज जी, रघुनन्दन शरण महाराज एवं पूज्य सिया रघुनाथ शरण महाराज जैसे विशिष्ट सन्त स्वामी गोमतीदास महाराज की परम्परा से निकले।
सिद्धपीठ श्री हनुमत-निवास से हनुमत उपासना के अनेक विशिष्ट स्थानों की परम्परा विकसित हुई। स्वामी गोमतीदास महाराज अयोध्या की विशुद्ध ईश निष्ठा एवं वैराग्य परम्परा की विभूति के रूप अमर है कार्यक्रम में उपस्थित राम जगद्गुरु दिनेशाआचार्य, छोटी छावनी अधिकारी कमल नयन दास, अधिकारी राजकुमार दास, किलाधीश,महंत मैथिलीशरण, महंत मनीष दास महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, आलोक मिश्रा पूर्व पार्षद, शरद शर्मा, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, महंत रवि शरण, बधाई भवन, महंत राजीव लोचन शरण, महंत राम लखन शरण, घनश्याम पहलवान, प्रियस दास, लक्ष्मण किला अधिकारी, सूर्य प्रकाश शरण, आदि संत महंत उपस्थित रहे।
Author: Rainbow News Hindustan
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