चित्तौडगढ से रेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट
पानी की धरती सगरा माता मंदिर में 18 से 3 दिवसीय विशाल मेला, 40 फीट रावण दहन होगा आकर्षण का केंद्र*
*चित्तौड़गढ़।* जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर भीलवाड़ा सिक्स लेन पर आजोल्या का खेड़ा और मेड़ीखेड़ा के बीच ऊंची पहाड़ी पर स्थित प्राचीन सगरा माता मंदिर में इस बार शारदीय नवरात्रि पर 3 दिवसीय विशाल मेले का आयोजन 18, 19 और 20 अक्टूबर 2026 को होगा।
*मंदिर का इतिहास और मान्यता -*
यह मंदिर लगभग 1400 से 2000 वर्ष पुराना बताया जाता है, इसका इतिहास चित्तौड़ दुर्ग से भी पुराना है। तलहटी से करीब 700 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में पहुंचने के लिए लगभग 350 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, दूसरा रास्ता वाहन से भी है। मंदिर में दो बहनों – बड़ी बहन सगरा माता और छोटी बहन नारसिंह/नाहरसिंह माता की प्रतिमाएं हैं। कथा है कि छोटी बहन से मिलने बड़ी बहन उठी तो छोटी वहीं बैठ गई, तब से सगरा माता खड़ी मुद्रा में हैं।
किंवदंती है कि 1400 साल पहले सगरा नामक बंजारे की बालद (बैलों की जोड़ी) खो गई थी। माता से मन्नत मांगने पर मिल गई, तो उसने मंदिर बनवाया, तभी से नाम सगरा माता पड़ा। मंदिर की पूजा गुर्जर समाज के पुजारी करते हैं। यह स्थल आसपास के 12 गांवों की आस्था का केंद्र है, राजस्थान-गुजरात से भी भक्त आते हैं।
इसे *पानी की देवी / पानी की धरती* कहा जाता है। मान्यता है कि किसान अपने खेत की मिट्टी लेकर यहां पानी की पाती मांगते हैं, माता जहां जगह बताती है वहां पानी की धारा निकल आती है। पहाड़ी पर स्थित हजारों साल पुरानी कुई (चमत्कारी कुआं) में आज भी पानी मौजूद है और उसका भी चमत्कार माना जाता है। रविवार को यहां दिन में तीन बार विशेष पूजा होती है।
पहली बार वर्ष 2002 में यहां शारदीय नवरात्र पर 3 दिवसीय मेले की शुरुआत हुई थी, तब से परंपरा जारी है।
*इस बार मेले का कार्यक्रम -*
*18 अक्टूबर -* मेला शुभारंभ, श्री देव म्यूजिकल ग्रुप गैजरा की प्रस्तुति, सिंगर भवानी शंकर और डांसर अनोखी राजस्थानी।
*19 अक्टूबर -* जेएलडी इवेंट द्वारा ऑर्केस्ट्रा।
*20 अक्टूबर -* मां चामुंडा ग्रुप सिंहपुर द्वारा ऑर्केस्ट्रा, 40 फीट विशाल रावण पुतला दहन, आकर्षक आतिशबाजी, राम-लक्ष्मण-हनुमान झांकी, पारितोषिक वितरण और समापन समारोह।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





